RENEABLE ENERGY: अर्थ, स्त्रोत, प्रकार, उदाहरण, महत्व और लाभ |

- May 25, 2019
कोई भी RENEWABLE ENERGY जो उन स्त्रोतो से प्राप्त होती हो, जिनकी प्रकृतिक रुप से पुनः प्राप्ती की जा सकती हो, वह RENEWABLE ENERGY के अंतर्गत आते है जैसे कि SOLAR ENERGY, WIND ENERGY, GEOTHERMAL ENERGY आदि। तेजी से खत्म होते खनिज और खनिज तेल वर्तमान समय में ऊर्जा के दो सबसे बड़े स्त्रोत है और इसलिये पूरा विश्व अपनी वर्तमान और भविष्य के ऊर्जा के जरुरतो को पूरा करने के लिये रिन्यूएबल एनर्जी के स्त्रोतो के उपयोग के तरफ आगे बढ़ रहा है।
इस विषय में खुद भारत में भी सार्थक बदलाव देखने को मिल रहे है, जिसमें बड़े-बड़े नदियो पर बांध बनाकर के बिजली उत्पन्न की जा रही है। इसके साथ ही पिछले कुछ वर्षो में हमने सौर ऊर्जा (SOLAR ENERGY) के क्षेत्र में भी हमने काफी तरक्की की है, जिसमें सरकार द्वारा सौर ऊर्जा परियोजनाओं में काफी सहायता प्रदान करने के साथ ही इसका काफी प्रचार-प्रसार किया गया है, जिससे अब इस क्षेत्र में प्राईवेट कंपनियो ने भी सौर पैनलो जैसे उत्पादो को बनाना शुरु कर दिया है।

नवीकरणीय ऊर्जा क्या है ? (Meaning of RENEWABLE ENERGY)

ऐसी ऊर्जा जो प्रकृति में असीम मात्रा और स्वतंत्र रुप से मौजुद हो वह नवकरणीय ऊर्जा कहलाती है। दुसरे शब्दो में हम कह सकते है कि रिन्यूएबल ऊर्जा वह उर्जा है जो कि हमे उन स्रोतो से प्राप्त होती है, जो प्रकृति में काफी ज्यादे मात्रा में उपलब्ध हो। सूर्य, पवन, और बहता हुआ जल कुछ ऊर्जा के स्रोत है, जोकि कभी समाप्त नही होंगे, क्योकि प्रकृति द्वारा इन्हे फिर से उत्पन्न कर दिया जाता है। इन सभी नवकरणीय ऊर्जाओं को विद्युत के रुप परिवर्तित करके संग्रहित कर लिया जाता है और हमारे उपयोग के लिये हम तक पहुंचाया जाता है।

रिन्यूएबल ऊर्जा के स्त्रोत क्या है ? (Source Of RENEWABLE ENERGY)

सूर्य, हवा, भू-उष्मा ऊर्जा और प्राकृतिक रुप से बहता हुआ पानी नवकरणीय ऊर्जा(RENEWABLE ENERGY) के तीन सबसे प्रमुख स्त्रोत है, जिनको पूरे विश्व के विभिन्न हिस्सो के साथ ही भारत में भी काफी तेजी के साथ अपनाया जा रहा है। बायोमास को भी नवकरणीय ऊर्जा के स्त्रोतो के श्रेणी में रखा गया है। सौर ऊर्जा हमे सूर्य से प्राप्त होती है, जबकि पवन ऊर्जा हवा द्वारा पवन टरबाइनो(पवनचक्की) को चलाकर प्राप्त की जाती है। इसी तरह जलविद्युत ऊर्जा को भी नदियों के बहते हुए पानी को बांध द्वारा रोककर और हाइड्रो इलेक्ट्रिक टरबाइनो को चलाकर प्राप्त किया जाता है। वही बायोमास ऊर्जा को जैविक वस्तुओ और पेड़-पौधे तथा पशुओ से प्राप्त होने वाले कचरे के द्वारा उत्पन्न किया जाता है।

रिन्यूएबल ऊर्जा के प्रकार (Types of RENEWABLE ENERGY)

इस संसार में विभिन्न प्रकार के नवकरणीय उर्जाये उपलब्ध है जो हमारी विभिन्न आवश्यकताओ के लिए स्वच्छ और टिकाऊ ऊर्जा प्रदान करती है। वृहद स्तर पर हम इन नवकरणीय ऊर्जाओ को इनके स्त्रोतो के आधार पर वर्गीकृत कर सकते है। जैसे कि वायु, सूर्य का प्रकाश, हवा और महासागर भी विभिन्न प्रकार के नवकरणीय ऊर्जा स्त्रोतो के उदहारण है।
  • जलविद्युतः जलविद्युत वह ऊर्जा है जिसे नदी के बहते हुए पानी को बांध द्वारा रोककर और उसके बहाव का उपयोग करते हुए टर्बाइनो को चलाकर उत्पन्न किया जाता है। पम्प्ड-स्टोरेज-हाइड्रोपावर और रन-ऑफ़-रिवर-हाइड्रोपावर दो भिन्न तरीके है जिनसे जलविद्युत परियोजनाओ द्वारा विद्युत का उत्पादन किया जाता है।
  • जैव उर्जाः इसकी उत्पत्ती बायोमास बायोनेर्जी से हुई है जोकि तरल ईधनो को उत्पन्न करने का एक नवकरणीय उर्जा स्त्रोत है, जिसमें विभिन्न प्रकार के कृषि अपशिष्टो के अपघटन से ईधन की प्राप्ति की जाती है।
    3. जियोथर्मल ऊर्जा: जियोथर्मल ऊर्जा एक ऐसी नवकरणीय ऊर्जा है जोकि पृथ्वी के अंदर के गर्मी की से उत्पन्न होती है। जियोथर्मल पावर प्लांट पृथ्वी और गर्म चट्टानो की ऊर्जा को अवशोषित करके विद्युत निर्माण करते है। इसके अलावा जियोथर्मल ऊर्जा का उपयोग पानी और भवनो को अपने इच्छा अनुकूल गर्म रखने के लिये भी किया जा सकता है।
  • सौर ऊर्जाः यह उर्जा सूर्य की ऊष्मा द्वारा उत्पन्न होती है, सौर ऊर्जा तमाम तरह के सौर ऊर्जा संसाधनो के द्वारा सूर्य की रोशनी को अवशोषित करके ऊष्मा या विद्युत का उत्पादन किया जाता है। सौर उर्जा भारत में व्यापक रुप से इस्तेमाल होने वाली नवकरणीय ऊर्जा है।
  • महासागरीय ऊर्जाः महासागरीय उर्जा भी नवकरणीय ऊर्जा के एक बड़े स्त्रोत में से एक है, जिसमें ज्वार भाटो और महासगरीय लहरो द्वारा ऊर्जा उत्पन्न की जा सकती है। हालांकि महासागरीय ऊर्जा के क्षेत्र में अभी कोई खास विकस नही हुआ है, लेकिन क्योकि पृथ्वी का लगभग 70 फीसदी हिस्सा महासागरो से घिरा हुआ है तो इस क्षेत्र में ऊर्जा उत्पादन की काफी संभावना है। इसलिये महासागर से उत्पन्न होने वाली ऊर्जा भविष्य में हमारी ऊर्जा आवश्यकताओ में एक बड़ा योगदान दे सकती है।
  • पवन ऊर्जाः पवन ऊर्जा नवकरणीय ऊर्जा का एक उत्कृष्ट उदहारण है, इसमें हवा द्वारा ऊर्जा का उत्पादन किया जाता है। जब हवा पवन टरबाइनो में बहती है तो इसके घूर्नन गति द्वारा नवकरणीय ऊर्जा उत्पन्न होती है। यह पवन टरबाइन हवा द्वारा ऊर्जा उत्पन्न करने वाले प्रणाली से जुड़े रहते है, जिससे की विद्युत का उत्पादन होता है। पवन ऊर्जा के निर्माण के लिये बड़े स्तर पर पवन चक्कियो का निर्माण समुद्री किनारो पर किया जाता है, जहाँ हवा काफी तेजी से बहती है।

नवकरणीय ऊर्जा के उदाहरण (Examples of Renewable Energy)

नवकरणीय ऊर्जा विभिन्न प्रकार के प्राकृतिक स्त्रोतो जैसे कि सूर्य का प्रकाश, जियोथर्मल ऊष्मा, लहरो, हवा, ज्वार और वर्षा आदि से प्राप्त की जा सकती है। सौर ऊर्जा, जलविद्युत ऊर्जा, जियोथर्मल ऊर्जा, जैविक ऊर्जा, जैव ईधन और पशु अपशिष्ट विभिन्न प्रकार के नवकरणीय ऊर्जा के उदाहरण है। नवकरणीय ऊर्जा द्वारा कई विधियो जैसे के ही हीटिंग, कूलिंग और टरबाइन चलाकर बिजली उत्पन्न की जा सकती है।

नवकरणीय ऊर्जा का महत्व और लाभ (Importance and Advantages of Renewable Energy)

तेजी से खत्म होते कच्चे तेल, कोयले और प्राकृतिक गैसो जैसे जीवाश्म ईधनो के वजह से नवकरणीय ऊर्जा के महत्व में काफी वृद्धि हुई है। क्योंकि यह भरपूर मात्रा में उपलब्ध होने के साथ सुरक्षित, स्वच्छ और प्रदूषण-रहित है, इसलिये पूरा विश्व विभिन्न नवकरणीय ऊर्जा स्त्रोतो के उपयोग के ओर आगे बढ़ रहा है। इस विषय में यहा नवकरणीय ऊर्जा के कुछ महत्वो और लाभो के विषय में बताया गया है।
  • नवकरणीय ऊर्जा की पृथ्वी पर भरपूर मात्रा में उपलब्धता
जल ऊर्जा या जलविद्युत ऊर्जा ने स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में एक नया क्रांति की शुरुआत की है। जिसमें बांधो द्वारा बड़ी नदीयो के पानी को रोककर और उस पानी से टरबाइन चलाकर जलविद्युत ऊर्जा स्टेशनो में विद्युत निर्माण किया जाता है। हम सब जानते है कि बहता हुआ पानी विशाल मात्रा में पृथ्वी पर उपलब्ध है, इसके अलावा पूरे विश्व में कई वर्ष भर बहने वाली विशाल नदियाँ है।
ठीक उसी प्रकार प्राकृतिक रुप से बहती हुई हवा भी ऊर्जा का एक बेहतरीन स्त्रोत है, जिसे पवन ऊर्जा के नाम से जाना जाता है। जिसमें हम तटीय क्षेत्रो में काफी मात्रा में स्थापित स बड़े- बड़े पवन टरबाइनो के सहायता से ऊर्जा का उत्पादन करते है। इसके अलावा सौर ऊर्जा भी नवकरणीय ऊर्जा का एक रुप है, जिसमें सूर्य के प्रकाश को अवशोषित करके नवकरणीय ऊर्जा उत्पन्न की जाती है।
  • नवकरणीय ऊर्जा के द्वारा ऊर्जा स्वायत्तता की प्राप्ति
वर्तमान में विश्व के ज्यादेतर देश अपने बढ़ते हुए ऊर्जा उत्पादन के जरुरतो के लिये खनिज ईधनो जैसे कि पेट्रोलियम और कोयले का आयात करते है। वही दूसरे तरफ नवकरणीय ऊर्जा के स्त्रोत आसानी से उपलब्ध है। नवकरणीय ऊर्जा को अपनाकर ऊर्जा के क्षेत्र में अधिक स्वायत्तता प्राप्त की जा सकती है और जीवाश्म और खनिज ईधनो के आयात को भी खत्म किया जा सकता है। इस बात को कहने की आवश्यकता नही है कि ऊर्जा स्वायत्तता हमे लाँखो डालर बचाने में सहायता प्रदान कर सकता है, जोकि एक विकासशील देश के अर्थव्यवस्था में काफी मददगार साबित हो सकता है।

  • ऊर्जा आवश्यकताओ का एक स्थिर समाधान

यह तो हम सभी जानते है कि खनिज और जीवाश्म ईधन तेजी से समाप्त होते जा रहे है और वह दिन दूर नही जब पेट्रोलियम और कोयला पूर्ण रुप से पृथ्वी से खत्म हो जायेंगे। अभी से ही दुनिया भर के कई तेल के कुए सूखने लगे है। इसके अलावा कोयले के कई सारे भंडार तेजी से खाली हो रहे है, जिससे की यह एक बड़ी समास्या बन गया है क्योकि कुछ देश ऐसे है जो ऊर्जा उत्पादन के लिये पूर्ण रुप से कोयले और पेट्रोलियम के आयात पर पर निर्भर है।
इसके विपरीत नवकरणीय ऊर्जा के स्त्रोत जैसे कि सूर्य, पवन और बायोमास ऊर्जा के स्थिर और सतत समाधान है और इनसे प्राप्त ऊर्जा काफी महात्वपूर्ण है। इसलिये ऊर्जा आवश्यकताओ के समाधान के लिये हमे इन नवकरणीय ऊर्जा के स्त्रोतो को अपनाने की जरुरत है। सौर ऊर्जा के उत्पादन और उपयोग के लिये फोटोवोल्टिक सेल और सौर पैनलों की आवश्यकता होती है, और जलविद्युत ऊर्जा के उत्पादन के लिये जलविद्युत प्लांटस के निर्माण की आवश्यकता होती है। इसी तरह पवन ऊर्जा के उत्पादन के लिये विंड फार्म और पवन टरबाइनो के निर्माण की आवश्यकता होती है।
  • नवकरणीय ऊर्जा प्रदूषण-रहित होती है
जीवाश्म ईधन जैसे कि पेट्रोलियम, कच्चे तेल, प्राकृतिक गैस और कोयले के दहन से उत्पन्न ऊर्जा प्रदूषण फैलाने वाली गैसे उत्पन्न करती है और ग्लोबल वार्मिंग में वृद्धि करती है। वही दूसरे तरफ नवकरणीय ऊर्जा वातावरण में प्रदूषण नही फैलाती है। जिससे की यह हमारे पृथ्वी की प्रदूषण और ग्लोबल वार्मिंग जैसी दानवरुपी समस्याओ से रक्षा करता है, इसलिए हमे नवकरणीय ऊर्जा के स्त्रोतो के द्वारा उत्पन्न प्रदूषण-रहित नवकरणीय ऊर्जा को अपनाने का हरसंभव प्रयास करने की आवश्यकता है।

निष्कर्ष |


वर्तमान समय में पूरा विश्व ज्यादेतर अनवीकरणीय ऊर्जा के स्त्रोतो पर निर्भर है, जोकि कच्चे तेल और कोयले जैसे जीवाश्म ईधनो से प्राप्त होता है। जिसके कारण जीवाश्म ईधन तेजी से खत्म होते जा रहे है तथा तेल उत्पादक देशो के तेल के कुंए तेजी से सूखते जा रहे है और कोयले के खदान भी खत्म होते जा रहे है। जोकि एक वैश्विक चिंता का विषय है और वह दिन दूर नही है जब पृथ्वी पर से जीवाश्म ईधन के भंडार पूरी तरह से समाप्त हो जाएँगे। जिससे कई सारी गतिविधिया और अर्थव्यवस्थाएं ठप पड़ जाएंगी।
इसके अलावा जीवाश्म ईधनो के दहन से पर्यावरण पर पहले से ही प्रदूषण और ग्लोबल वार्मिंग जैसे कई संकट मंडरा रहे है। जिससे हमारी माँ तुल्य यह पृथ्वी बेचैन हो उठी है और अब यह वह समय है जब हमें नवकरणीय ऊर्जा स्त्रोतो के उपयोग तरफ बढ़ने की आवश्यकता है, जिससे ना सिर्फ प्रदूषण-रहित ऊर्जा का उत्पादन हो सके बल्कि की हमारे आने वाली पीढ़ीयो और प्राकृतिक वातावरण की भी सुरक्षा हो सके।
Advertisement

 

Start typing and press Enter to search