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महल और झोंपडे।



आज के भारत को अपने इतिहास से कई एक सबक लेने हैं। वस्तुतः हमारा इतिहास संसार की एक महान जाति के उतार-चढ़ाव, सफलता और असफलताओं की कहानी है। लगभग 3000 वर्षों की परिधि में फैली इस कहानी में ऐसी अनेक बातें हैं जो हमारी स्वतंत्र रहने की कामना को सही सही दिशा निर्देश दे सकती हैं।
इतिहास के केवल भारत ही नहीं बल्कि समस्त संसार के इतिहास के सबसे महत्वपूर्ण सबको में से एक यह है कि किसी भी राष्ट्र की शक्ति उसकी जनता की संपन्नता और संतुष्टि पर निर्भर रहती है । ऐसे अनेक देशों के उदाहरण हमारे सामने हैं , जिनके दरबार विद्वानों और विशेषज्ञों से भरे हुए थे । दरबारियों के पास धन शक्ति और विलास के प्रचुर साधन थे , कला अपने पूर्ण उत्कर्ष पर विद्यमान थी और ऊंची ऊंची इमारतों से नगर अपने सौंदर्य में समाते न थे । फिर भी दुश्मन के नगाड़ों की ध्वनि मात्र ने उन्हें अविलंब धराशाई कर दिया।
वास्तव में किसी राष्ट्र के पतन का मुख्य कारण महल और झोपड़े के बीच की दूरी होती है! धनीकों के ऐश्वर्य तथा गरीब की गरीबी के बीच की गहरी खाई।

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